भाग-2 · अध्याय-1
वर्ष 2015 — नींव का वर्ष
प्रथम वर्ष · बहुजन मुक्ति दिवस
25 दिसंबर 2015 · क्लब भूमि, बीटा-2, ग्रेटर नोएडा
गौतम बुद्ध नगर की धरती पर 25 दिसंबर के ऐतिहासिक सफर की विधिवत शुरुआत वर्ष 2015 से हुई।
यह प्रथम आयोजन था जिसने आगे चलकर बौद्ध महोत्सव की मजबूत नींव रखी।
आयोजन की मूल जानकारी
- आयोजन का नाम
- बहुजन मुक्ति दिवस — 25 दिसंबर 2015
- स्थान
- क्लब भूमि, बीटा-2, थाने के पास, ग्रेटर नोएडा, गौतम बुद्ध नगर
- आयोजन समिति
- बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह संघ, गौतम बुद्ध नगर
- अध्यक्षता
- आदरणीया अर्चना गौतम जी (एल्डिको ग्रीन मिडोज, ग्रेटर नोएडा)
- धम्म देशना
- परम पूज्य भंते डॉ. नागभूषण जी
- भिक्खु संघ
- लगभग 20–22 पूज्य भिक्खु गण
- जन-उपस्थिति
- 10,000 से अधिक लोग
- सदस्यता राशि
- कोई निर्धारित नहीं — पूर्णतः जन-सहयोग से
मंच संचालन
- प्रथम पाली — विनोद भीम दूत जी, ग्राम दयानतपुर, जेवर
- द्वितीय पाली — रमेश गौतम जी, मालीवाड़ा, गाजियाबाद
पदाधिकारी गण
मुख्य प्रचारक
सूरजपाल राक्षस जी
आयोजक मंडल के सदस्य
आयोजन की नींव जिन साथियों के अथक परिश्रम से रखी गई:
1. रमेश गौतम जी — मालीवाड़ा, गाजियाबाद
2. डॉ. डी. वी. सेहरा बौद्ध जी — वसुंधरा, गाजियाबाद
3. सूरजपाल राक्षस, एडवोकेट — सर्फाबाद, सेक्टर-73, नोएडा
4. विनोद भीम दूत जी — दयानतपुर, जेवर
5. के.पी. सिंह जी — अल्फा-1, ग्रेटर नोएडा
6. संघमित्रा गौतम जी — पी-3, ग्रेटर नोएडा
7. अर्चना गौतम जी — एल्डिको ग्रीन मिडोज, ग्रेटर नोएडा
8. चंद्रप्रभा बौद्ध जी — ग्राम कनेरसा, ग्रेटर नोएडा
9. अशोक कुमार जी — ग्राम खानपुर, ग्रेटर नोएडा
10. शिवकुमार बौद्ध जी — ग्राम गालंद, हापुड़
11. अरुणा हरित जी — बीटा-2, ग्रेटर नोएडा
12. प्रवीण मिलिंद जी — गौतमपुरी, दादरी
13. डालचंद गौतम जी — दयानतपुर, जेवर
14. योगेश चित्रसेन जी — ग्राम चिंगरावली, बुलंदशहर
15. सुशील प्रेमी जी — ग्राम सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा
16. प्रिंस प्रभाकर जी — ग्राम डुढेरा, जेवर
मुख्य अतिथि एवं वक्ता गण
- बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध जी — संस्थापक, सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली
- डॉ. इंदु चौधरी जी — प्रोफेसर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
- इंजी. अनिल कुमार जी — वाइस प्रेसिडेंट, बी.एस.ई.एस., नई दिल्ली
- राम सिंह गौतम जी — धम्म प्रचारक, ग्राम सिहानी, गाजियाबाद
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- सद्धम कला मंच, नई दिल्ली — हेमंत बौद्ध जी, तरन्नुम बौद्ध जी
- बुद्ध धम्म प्रचारक मंडल, दयानतपुर, जेवर — मोरध्वज गौतम, त्रिशला गौतम, चोखेलाल गौतम, धनुष पाल गौतम
- बांसुरी वादन — ताराचंद पेंटर जी, जेवर
विशेष ऐतिहासिक नाट्य मंचन — पूना पैक्ट
इस आयोजन का सबसे आकर्षक और ऐतिहासिक क्षण था — पूना पैक्ट पर आधारित नाट्य मंचन।
बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर एवं गांधी जी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के मध्य पुणे की येरवडा जेल में हुए
समझौते का जीवंत मंचन किया गया।
प्रतिभागी: डालचंद गौतम, प्रवीण मिलिंद, सुशील प्रेमी, योगेश चित्रसेन, कपिल प्रेमी, चंचल गौतम, अजीत गौतम
तथा भीम ज्ञान चर्चा से जुड़े छात्र-छात्राएँ। संचालन: आदरणीय बृजभूषण मास्टर जी, दादरी।
नारे एवं स्लोगन
बुद्ध धम्म की क्या पहचान? मानव-मानव एक समान!
भीम दूत आए हैं, भीम संदेशा लाये हैं
भीम तरंगे आई हैं, नई रोशनी लाई हैं
भोजन व्यवस्था
प्रचार-प्रसार के दौरान प्रयास था कि हर व्यक्ति को बिना अतिरिक्त प्रयास के भोजन मिले।
समिति की बैठक में स्वयं की किचन व्यवस्था का सुझाव था, परंतु अंत में डॉ. अंबेडकर हॉस्टल, ग्रेटर नोएडा के
मेस इंचार्ज को ढाई हजार लोगों के लिए सब्जी-पूरी का ₹40,000 का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।
वास्तविक उपस्थिति 10,000 से अधिक रही; लगभग 8,000 लोगों को खाना खिलाया गया और भुगतान ₹1,35,000 हुआ।
बीच में खाना बंद रहा, असुविधा हुई। टीम संतुष्ट नहीं रही।
सबक: अगले वर्ष से स्वयं की हलवाई वाली व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया।
प्रचार-प्रसार
अनौपचारिक रूप से तीन-चार महीने पहले प्रचार शुरू हुआ। सूरजपाल एडवोकेट जी को 2 महीने के लिए
पूर्णकालिक प्रचारक बनाया गया। विशेष योगदान: विनोद बौद्ध जी, योगेश चित्रसेन जी, डालचंद गौतम जी,
सुशील प्रेमी जी, के.पी. सिंह जी एवं संघमित्रा गौतम जी।
वित्त व्यवस्था एवं बजट
पूर्ण रूप से चंदा जुटाकर। कलेक्शन बुक छपवाकर सदस्यों द्वारा धन जुटाया गया।
नैतिक जिम्मेदारी थी, अनिवार्य कुछ नहीं। अनुमानित बजट लगभग ₹6 लाख।
जन-उपस्थिति
10,000 से अधिक लोग शामिल हुए। क्षेत्र की जनता का भरपूर प्यार प्राप्त हुआ।
“जब शुरुआती बैठकें हो रही थीं तब आदरणीय रमेश गौतम जी ने टीम को 2000 लोगों का टारगेट दिया था।
उन्होंने कहा था — यदि तुम 1500 लोग भी इकट्ठा कर लेते हो तो सफल माने जाओगे।”
प्रचार टीम को पहले से अंदाजा था कि 10,000 से अधिक आएंगे; दो दिन पहले समिति को बताया गया,
पर तब यकीन नहीं हुआ था।
टेंट एवं पंडाल व्यवस्था
अमृता टेंट एंड डेकोरेशन के संचालक श्रद्धेय नरेश गौतम जी द्वारा सुंदर पंडाल।
पहली बार दलित समाज के धार्मिक-सांस्कृतिक प्रोग्राम में ट्रस के पिलर वाला मंच, शानदार सोफे,
कवर कुर्सियाँ, कारपेटिंग और आकर्षक मुख्य द्वार।
विशेष: सफलता के बाद नरेश गौतम जी स्वयं आयोजन समिति के सदस्य बने;
कई बार अध्यक्ष भी रहे। बौद्ध महोत्सव की सफलता में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
अन्य व्यवस्थाएँ
- साउंड — देवेंद्र साउंड, दयानतपुर, जेवर
- साहित्य स्टॉल — बहुजन साहित्य की 20–25 स्टॉल
- फोटो एवं वीडियोग्राफी — ज्ञान प्रकाश जी (सूरजपुर) की टीम; परी चौक व गोल चक्कर भी कवर
- मूर्ति स्थापना — भगवान बुद्ध और बाबासाहेब की पीतल की मूर्तियाँ मुख्य द्वार के सामने; गुलाब के फूल; फोटो का केंद्र
- शहर की साज-सज्जा — परी चौक सहित गोल चक्करों पर पंचशील के झंडे और डायरेक्शन बोर्ड
- प्रिंटिंग — पेपर/पोस्टर/अपील: संदीप बौद्ध जी (सम्यक प्रकाशन); फ्लेक्स/बैनर: योगेश चित्रसेन जी (वाई.के. एंटरप्राइजेज)
व्यवस्था बनाते वॉलिंटियर
वाहन पार्किंग, भोजन आदि के लिए 100 युवक-युवतियों को वॉलिंटियर बनाया गया।
15 वॉलिंटियरों को वॉकी-टॉकी दिए गए — गेट, ग्राउंड, पार्किंग और मंच के बीच तालमेल।
मंच संचालक उनके संदेश अनाउंस करते थे। चाक-चौबंद अनुशासित व्यवस्था।
सामूहिक बस प्रबंधन — सबसे बड़ी रणनीति
समिति के समक्ष चुनौती थी — गरीब और मेहनतकश लोगों को आयोजन तक पहुँचाना।
ग्रामीण क्षेत्र के लिए ₹200 फिक्स वाली कलेक्शन बुक (25 रसीदें, एक बुक = ₹5000) छपवाई गई।
“ग्रेटर नोएडा बहुत धनी शहर है और यहाँ हमारे लोगों ने संपूर्ण खर्च वहन किया है।
आपको दान देने की आवश्यकता नहीं; बस अपने गाँव से एकत्रित राशि बस के किराए पर खर्च कर
महिलाओं और बच्चों के साथ सुरक्षित पहुँचें।”
सैकड़ों गाँव से लोग सामूहिक बस लेकर आए। महिलाओं और बच्चों की भागीदारी लगभग 60% हो गई —
आंदोलन के हित में गर्व की बात। यह आगे के वर्षों के लिए ट्रेंड बन गया।
पंचशील के झंडों का वितरण
जिन गाँवों से बस बुक हुई, वहाँ पंचशील के झंडे और गले के पटके पहुँचाए गए।
लोग झंडे लेकर नारे लगाते हुए शामिल हुए — बुद्ध धम्म की क्या पहचान? मानव-मानव एक समान!
निष्कर्ष
25 दिसंबर 2015 के दिन पहली बार जनपद गौतम बुद्ध नगर की भूमि पर बहुजन मुक्ति दिवस
के रूप में आयोजित यह उत्सव बेहद सफल रहा। इसी नींव पर आगे के वर्षों का बौद्ध महोत्सव खड़ा हुआ।